नाटक या टॉर्चर..??
हैलो दोस्तों, कैसे हो आप सभी, उम्मीद हैं भगवानके आशीर्वाद से सभी अच्छे होंगे तो मैं प्रियांशु खण्डेलवाल फिर से हाजिर हूॅं आप सभी के सामने एक नये BLOGS के साथ....उम्मीद हैं आप सभी ने मेरे पिछले सभी BLOGS भी पढ़ लिए होंगे यदि नहीं पढ़े हैं तो पढ़ लीजिएगा।। हो सकता हैं किसी को पसन्द आयें भी हो और किसी को ना भी आयें। लेकिन अब जो मैं लिखने जा रहा हूँ वो जरुर पढ़ लीजिएगा खासकर लड़कियां जरुर पढ़े और SUPPORT करें, तो चलिए Start करते हैं..... क्या हर महीनें का यहीं ड्रामा?? इतना क्या दर्द होता हैं?? अब तक आदत भी नहीं पड़ी?? कभी-कभी तो ये भी सुनने को मिलता हैं, मूड स्विंग्स, क्रैम्प्स ummm सब बहाने हैं। सच्चाई सुनना चाहते हो?? चलो बताता हूॅं। हर महीने अंदर एक जंग शुरु होती हैं, कमर ऐसे टूटती है जैसे किसी ने पीछे से पकड़कर मरोड़ दी हो, पेट में ऐसा दर्द होता हैं कि खड़ा होना मुश्किल और ऊपर से ब्लीडिंग.... लगातार, बिना रुकें। ऑफिस भी जाती है, घर भी संभालती है, लोगों को फेस भी करती है और ये सब करते हुए....चेहरे पर जो हॅंसी होती है, वो नकली होती है क्योंकि अंदर सिर्फ और सिर्फ दर्द...